Cryobiopsy: Lung Ki Bimari Mein Sahi Diagnosis Ke Liye Advanced Technique – Dr. Dipak Viradia
Lung ki bimari mein sahi diagnosis hi sahi treatment ki shuruaat hai. Surat ke Chest Physician Dr. Dipak Viradia samjhate hain ki…
Watch Videoफेफड़ों की कई बीमारियों में सही इलाज तभी शुरू हो सकता है जब सही निदान हो, और इसके लिए अक्सर फेफड़ों के टिशू का सैंपल (बायोप्सी) जरूरी होता है। पहले कई मामलों में यह सैंपल लेने के लिए सर्जरी करनी पड़ती थी। अब क्रायो लंग बायोप्सी की आधुनिक तकनीक से यह बिना किसी चीरे और बिना सर्जरी के संभव है। इस वीडियो में Dr. Dipak Viradia, चेस्ट फिजिशियन और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट, इस तकनीक के बारे में बताते हैं।
इसमें ब्रोंकोस्कोप (एक पतली, लचीली नली) को मुंह के रास्ते सांस की नली में डाला जाता है। इसके अंदर से एक क्रायोप्रोब को फेफड़ों के उस हिस्से तक ले जाया जाता है जहां से सैंपल लेना है। प्रोब की नोक बहुत ठंडी हो जाती है, जिससे आसपास का टिशू जमकर उससे चिपक जाता है। फिर प्रोब को टिशू के साथ बाहर निकाल लिया जाता है।
टिशू कुचलने के बजाय जमाकर निकाला जाता है, इसलिए सैंपल बड़ा और बेहतर गुणवत्ता का होता है।
अनुभवी टीम द्वारा किए जाने पर यह प्रक्रिया सुरक्षित है। हर बायोप्सी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम होते हैं, जैसे हल्का रक्तस्राव, जो आमतौर पर प्रक्रिया के दौरान ही नियंत्रित हो जाता है, और कभी-कभी फेफड़े में हवा भर जाना (न्यूमोथोरैक्स), जिसमें छोटी चेस्ट ट्यूब की जरूरत पड़ सकती है। आपके डॉक्टर आपके स्कैन, फेफड़ों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य को देखकर तय करेंगे कि यह आपके लिए उपयुक्त है या नहीं।
Dr. Dipak Viradia
चेस्ट फिजिशियन और इंटेंसिविस्ट | इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट और ECMO स्पेशलिस्ट
Rudrax Chest Clinic, 301, Solaris Royce, Opp. Old RTO, Athwagate, Ring Road, Surat – 395001
अपॉइंटमेंट: +91 75676 19985
वेबसाइट: www.drdipakviradia.com
यह ब्रोंकोस्कोपी द्वारा की जाने वाली प्रक्रिया है, जिसमें बहुत ठंडे प्रोब की मदद से बिना सर्जरी फेफड़ों का बड़ा और बेहतर टिशू सैंपल लिया जाता है।
नहीं। प्रक्रिया बेहोशी या एनेस्थीसिया में की जाती है। बाद में हल्की खांसी या गले में खराश हो सकती है।
हां। बड़ा सैंपल कैंसर के सही निदान और मॉलिक्यूलर जांच में मदद करता है, जिससे टारगेटेड थेरेपी तय होती है। इसका दूसरा मुख्य उपयोग फेफड़ों के फाइब्रोसिस (ILD) की जांच में है।