बिना सर्जरी फेफड़ों की बायोप्सी: क्रायो लंग बायोप्सी – Dr. Dipak Viradia

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बिना सर्जरी फेफड़ों की बायोप्सी: क्रायो लंग बायोप्सी – Dr. Dipak Viradia

October 17, 2026

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फेफड़ों की कई बीमारियों में सही इलाज तभी शुरू हो सकता है जब सही निदान हो, और इसके लिए अक्सर फेफड़ों के टिशू का सैंपल (बायोप्सी) जरूरी होता है। पहले कई मामलों में यह सैंपल लेने के लिए सर्जरी करनी पड़ती थी। अब क्रायो लंग बायोप्सी की आधुनिक तकनीक से यह बिना किसी चीरे और बिना सर्जरी के संभव है। इस वीडियो में Dr. Dipak Viradia, चेस्ट फिजिशियन और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट, इस तकनीक के बारे में बताते हैं।

क्रायो लंग बायोप्सी क्या है?

इसमें ब्रोंकोस्कोप (एक पतली, लचीली नली) को मुंह के रास्ते सांस की नली में डाला जाता है। इसके अंदर से एक क्रायोप्रोब को फेफड़ों के उस हिस्से तक ले जाया जाता है जहां से सैंपल लेना है। प्रोब की नोक बहुत ठंडी हो जाती है, जिससे आसपास का टिशू जमकर उससे चिपक जाता है। फिर प्रोब को टिशू के साथ बाहर निकाल लिया जाता है।

टिशू कुचलने के बजाय जमाकर निकाला जाता है, इसलिए सैंपल बड़ा और बेहतर गुणवत्ता का होता है।

किन बीमारियों में मददगार?

  • फेफड़ों का फाइब्रोसिस (इंटरस्टिशियल लंग डिजीज / ILD): इसमें सही प्रकार जानने के लिए बड़ा सैंपल चाहिए होता है। कई मरीजों में क्रायोबायोप्सी से सर्जिकल बायोप्सी की जरूरत नहीं पड़ती।
  • लंग कैंसर: बड़ा सैंपल सही निदान के साथ-साथ मॉलिक्यूलर / जेनेटिक जांच के लिए जरूरी होता है, जिससे तय होता है कि मरीज को टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी मिल सकती है या नहीं।
  • अन्य स्थितियां: फेफड़ों के कुछ इन्फेक्शन और ऐसे धब्बे जिनका कारण सामान्य बायोप्सी से पता न चला हो।

प्रक्रिया कैसे होती है?

  • प्रक्रिया बेहोशी या एनेस्थीसिया में की जाती है, इसलिए मरीज को आराम रहता है।
  • सही जगह तक पहुंचने के लिए लाइव एक्स-रे (फ्लोरोस्कोपी) या रेडियल EBUS की मदद ली जा सकती है।
  • सुरक्षा के लिए सांस की नली में एक बैलून रखा जा सकता है ताकि रक्तस्राव को नियंत्रित किया जा सके।
  • प्रक्रिया लगभग एक घंटे की होती है, और कई मरीज उसी दिन या अगले दिन घर जा सकते हैं।

फायदे

  • कोई चीरा या टांका नहीं
  • बड़ा और बेहतर सैंपल, जिससे सही निदान
  • कई मामलों में सर्जरी से बचाव
  • सर्जरी की तुलना में जल्दी रिकवरी

क्या यह सुरक्षित है?

अनुभवी टीम द्वारा किए जाने पर यह प्रक्रिया सुरक्षित है। हर बायोप्सी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम होते हैं, जैसे हल्का रक्तस्राव, जो आमतौर पर प्रक्रिया के दौरान ही नियंत्रित हो जाता है, और कभी-कभी फेफड़े में हवा भर जाना (न्यूमोथोरैक्स), जिसमें छोटी चेस्ट ट्यूब की जरूरत पड़ सकती है। आपके डॉक्टर आपके स्कैन, फेफड़ों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य को देखकर तय करेंगे कि यह आपके लिए उपयुक्त है या नहीं।

Dr. Dipak Viradia
चेस्ट फिजिशियन और इंटेंसिविस्ट | इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट और ECMO स्पेशलिस्ट
Rudrax Chest Clinic, 301, Solaris Royce, Opp. Old RTO, Athwagate, Ring Road, Surat – 395001
अपॉइंटमेंट: +91 75676 19985
वेबसाइट: www.drdipakviradia.com

Frequently Asked Questions

यह ब्रोंकोस्कोपी द्वारा की जाने वाली प्रक्रिया है, जिसमें बहुत ठंडे प्रोब की मदद से बिना सर्जरी फेफड़ों का बड़ा और बेहतर टिशू सैंपल लिया जाता है।

नहीं। प्रक्रिया बेहोशी या एनेस्थीसिया में की जाती है। बाद में हल्की खांसी या गले में खराश हो सकती है।

हां। बड़ा सैंपल कैंसर के सही निदान और मॉलिक्यूलर जांच में मदद करता है, जिससे टारगेटेड थेरेपी तय होती है। इसका दूसरा मुख्य उपयोग फेफड़ों के फाइब्रोसिस (ILD) की जांच में है।